देश के सांस्कृतिक केन्द्रों के प्रति कार्पोरेट जगत का उत्तरदायित्व
इफ्फी-गोवा 2009 में अनुभवी फिल्म निर्माताओं ने आज कहा कि देश के सांस्कृतिक केन्द्रों के प्रति कार्पोरेट जगत का उत्तरदायित्व बनता है ।
शाजी करूण की कुट्टी श्रंक, एम एस सत्यु की इज्जोडु और रितुपर्णो घोष की शॅब चरित्रों काल्पोनिक के निर्देशकों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रिलायन्स बिग पिक्चर के मामले में कार्पोरेट फिल्म निर्माणकर्ता संगठनों की परियोजना के लिए कार्यकर्ता संगठनों के कार्य करने पर अपने विचार व्यक्त किये ।
एक लम्बे अन्तराल के बाद निर्देशन में पुन: वापसी करने वाले एम एस सत्यु ने अपने अनुभव के विषय में बताते हुए कहा कि नई प्रौद्योगिकी ने सारे दृश्य को बदल दिया है और त्वरित संपादन एक कसौटी बन चुका है तथापि, शॉट को अपने प्रभाव की व्याख्या करने की अनुमति देते हुए मैं अपने रास्ते पर दृढ हूं ।
एम एस सथ्यु ने खुलासा किया कि इज्जोडु का विचार उनके मन में 30 वर्ष पहले आया था और उनके छायांकन निदेशक भाष्कर ने कहा कि ऐसा लगता है कि इज्जोडु की समझ के लिए लोकेशन तैयार करने हेतु समय अभी भी स्थिर है ।
शाजी करूण की अग्रणी नायिका पद्माप्रिया ने उनके साथ काम करने के अनुभव को संवेदनात्मक और आत्मिक उन्नयन का अनुभव बताया ।
बिपासा बसु जैसे सितारों के साथ काम करने के विषय में पूछने पर रितुपर्णो घोष ने कहा कि कलात्मक सन्दर्भ में रहने वाली उनकी देहयष्टि के ख्याल द्वारा अधिरोपित सीमाओं से उन्हें मुक्त करना एक चुनौती है । अपने नायक प्रॉसेनजीत, जिन्होंने एक कवि की भूमिका निभायी, प्रतिदिन एक पृष्ठ का छोटा लेख लिखते थे । रितुपर्णो घोष ने कहा कि फिल्म में काम प्रवृत्ति, कौतुक और गूढता के दृश्य मिश्रण की मांग जिसे सौमिक हल्दर ने सफलतापूर्वक पूरा किया एक चुनौतीपूर्ण कार्य था ।