छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी और पिछड़े अंचलों में रहने वाले किसानों तक अब खेती-किसानी के उन्नत और आधुनिक तरीके पहुंचने लगे हैं किसानों को इससे होने वाले फायदे भी नजर आने लगे हैं और वे इन्हें खुशी-खुशी अपना भी रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पिछड़े आदिवासी बाहुल्य अंचलों में संचालित राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परियोजना से किसानों ने अपने खेतों में अरहर, रागी, रामतिल और सब्जी आदि फसलों के साथ मछली उत्पादन में आशातीत सफलता पायी है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश के बस्तर जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड वास्तानार विकासखंड के ग्राम तोरागुर, जामगांव, लालागुड़ा और पीरमेटा के किसानों ने इस परियोजना के तहत स्थानीय कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन लेकर अपने खेतों की जमीन में फसल उत्पादन बढ़ाकर एक तरह से सोना उपजाना सीख लिया है। इन गांव के किसानों ने कृषि महाविद्यालय सहित राज्य शासन के कृषि विभाग के सहयोग से उन्नत खेती को अपनाकर साग-सब्जी उत्पादन करने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों के अलावा रागी कुल्थी जैसी लघु धान्य फसलों का बेहतर उत्पादन करने के तरीके सीख लिये हैं। इन गांवों के किसानों ने राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परियोजना के जरिए कृषि महाविद्यालय की मदद से छोटे-छोटे तालाबों में मछली पालन और बतख पालन करना भी जान लिया है।
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परियोजना के तहत बस्तर जिले के वास्तानार विकासखंड के गांवों में खेती-किसानी के उन्नत और आधुनिक तरीकों के साथ-साथ अन्य सहयोगी धंधों को अपनाने किसानों को प्रोत्साहित करने और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए कृषि महाविद्यालय जगदलपुर को नोडल एजेंसी बनाया गया है। महाविद्यालय के विशेषज्ञों के कुशल मार्गदर्शन में गांव के किसानों ने अपने खेतों में उन्नत तरीके से अरहर, रागी, रामतिल, धान सहित साग-सब्जी की फसलें लगाई हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विभाग के अधिकारी भी इन फसलों का समय-समय पर अवलोकन करते रहे हैं। जामगांव के किसानों श्री पण्डरू भीमा ने बताया कि जगदलपुर कृषि महाविद्यालय के बदौलत ही उसकी तरह गांव के कई किसानों ने अपनी बंजर भूमि पर खेती करके उसे उपजाऊ बना लिया है। श्री पण्डरू भीमा ने अपने खेत मे ंतालाब बनाकर मछलीपालन और बतख पालन भी किया है। जामगांव के ही किसान श्री मांझी ने कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही अपने खेत में अरहर की फसल लगाई है। इस लहलहाती फसल को देखने क्षेत्र के अन्य किसान भी श्री मांझी के खेत पर आ रहे हैं।
तुरागुर गांव में किसानों ने परियोजना के तहत खेतों में सब्जी उत्पादन और प्रदर्शन का कार्यक्रम लिया है। गांव के किसान सर्वश्री मन्नु, लिबरू, जुगन, लुदरू, सुधर और बुटुराम सहित बोरजा आदि ने बताया कि कृषि महाविद्यालय के मार्गदर्शन और सहयोग से ग्रामीणों ने अपने खेतों में सभी प्रकार की सब्जी उगाई हैं। गांव में राज्य शासन द्वारा संचालित शांकभरी योजना के तहत लगभग 20 किसानों ने खेतों में सिंचाई पम्प स्थापित किए हैं। रिंग पध्दति से खेतों में ही कुंए खोदे गए हैं। इन कुंओं पर स्थापित पम्पों से खेतो ंमें लगी सब्जी की फसल में सिंचाई की जाती है। तुरागुर गांव में 45 किसानों को चेक डेम के माध्यम से सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। गांव के अन्य दस किसानों ने मछली पालन और बतख पालन की इकाईयां भी स्थापित की हैं। जामगांव के लगभग 50 किसानों ने रागी, रामतिल और धान फसलों के प्रदर्शन भी अपने खेतों में लगाए हैं। इसी तरह लालागुड़ा और पीरमेटा में भी लगभग डेढ़ सौ किसानों ने रामतिल उत्पादन के लिए फसल प्रदर्शन लिए हैं।