आशा श्रीवास्तव जी ने अमिताभ बच्चन को पत्र लिखकर अपनी एक खास कविता के बारे में बताया । आप भी पढ़े पत्र और कविता -
माननीय सदीनायक अमिताभजी,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग में मेरा यह पहला पत्र है। मेरे लिए अपना थोड़ा परिचय देना जरूरी है। मेरा नाम आशा श्रीवास्तव है और मेरी उम्र 72 साल है। मैंने 1960 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए किया और 34 साल अंग्रेजी पढ़ाई। मेरा यह परिचय एकदम मामूली हे। परन्तु इस अर्थ में अपने आप को विशिष्ट मानती हूँ कि विगत 40 वर्षों से मैं कविवर बच्चन जी की प्रशंसिका हूँ। बच्चनजी का कविता के स्वर्णिम काल को मैंने बड़ी शिद्दत से जिया है और उनकी काव्य प्रतिमा को दिवानगी की हद तक चाहा है। पितृ पक्ष में मैंने आपके द्वारा एक न्यूज चैनल पर अपने पिताजी की स्मृति में एक कवि सम्मेलन कराने की खबर सुनी इस खबर में मुझे मेरे जीवन काल के 40 पीछे का खड़ा किया। उन दिनों हम कॅलेज गैदरिंग तथा कविसम्मेलनों में बच्चन जी को मधुशाला का पाठ करते सुना करते थे उनकी हाला की असर शबाब पर था। कविता पढ़ते-पढ़ते कब मैंने कलम पकड़ ली मुझे पता ही न चला। वैसे मेरी रचनाएं केवल उद्गारों का प्रागट्य मात्र थीं जिसमें शब्द शक्ति और शिल्प का अभाव रहता था पर जैसा उन्होंने कहा है
जब दिल विगलित हो जाता है तब वह कैसे जम सकता है धारा को मोड़ भलेही दो पर वेग कहां थम सकता है। Read Full Kaput Article »
ईद उल जुहा पर राष्ट्रपति की बधाइयां
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने ईद उल जुहा के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है ।
अपने बधाई संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, न्न ईद उल जुहा के पावन अवसर पर मैं अपने देश के नागरिकों को बधाई देती हूं ।
यह पर्व उनमें साझी संस्कृति की भावना समृध्द करे तथा एकता एवं सद्भाव को मजबूत बनाए एवं हमें सभी के कल्याण के वास्ते प्रयास करने को प्रेरित करे । न्न ईद उल जुहा कल मनाया जाएगा । Read Full Kaput Article »
देश के सांस्कृतिक केन्द्रों के प्रति कार्पोरेट जगत का उत्तरदायित्व
इफ्फी-गोवा 2009 में अनुभवी फिल्म निर्माताओं ने आज कहा कि देश के सांस्कृतिक केन्द्रों के प्रति कार्पोरेट जगत का उत्तरदायित्व बनता है ।
शाजी करूण की कुट्टी श्रंक, एम एस सत्यु की इज्जोडु और रितुपर्णो घोष की शॅब चरित्रों काल्पोनिक के निर्देशकों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रिलायन्स बिग पिक्चर के मामले में कार्पोरेट फिल्म निर्माणकर्ता संगठनों की परियोजना के लिए कार्यकर्ता संगठनों के कार्य करने पर अपने विचार व्यक्त किये । Read Full Kaput Article »
क्या भारत में पारिवारिक फिल्मी मनोरंजन मंगल ग्रह में पाया जाता है।
डिज्नी के दिग्गज ने पूछा भारत में कहां है पूरे परिवार के लिए भरपूर फिल्मी मनोरंजन ?
7 डेज़ इन स्लो मोशन के निर्देशक और अनेक वर्षों से डिज्नी फीचर एनीमेशन से जुड़े उमाकांथ थुमरूगोटी ने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है कि देश में कला फिल्मों और बड़ी व्यावसायिक फिल्मों के बीच इतनी बड़ी खाई है कि उसे आम तौर पर पाटना संभव नहीं हो पाता। Read Full Kaput Article »
कॉन्सटेन्टी एक बड़ा कारोबारी है, जिसे जीवन में पहली बार एक ऐसी समस्या से जूझना पड़ रहा है, जिसने उसे पूरी तरह हताश कर दिया है । वास्तव में उसे दिल की एक ऐसी बीमारी हो गई है, जो उसके जीवन को खतरे में डाल सकती है ।
ऐसे में उसे पता चलता है कि केवल तत्काल ट्रांसप्लांट करने से ही उसका जीवन बच सकता है । इसके लिए कॉन्सटेन्टी को स्टीफन नाम का एक असफल व्यक्ति मिल जाता है, जो अपने जीवन से तंग आ चुका है । कॉन्सटेन्टी इस व्यक्ति को मनाने की कोशिश में लग जाता है कि वह उसके लिए अपना जीवन फिर कुर्बान करने के लिए तैयार हो जाए । Read Full Kaput Article »
7 डेज़ इन स्लो मोशन के निर्देशक और अनेक वर्षों से डिज्नी फीचर एनीमेशन से जुड़े उमाकांथ थुमरूगोटी ने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है कि देश में कला फिल्मों और बड़ी व्यावसायिक फिल्मों के बीच इतनी बड़ी खाई है कि उसे आम तौर पर पाटना संभव नहीं हो पाता। उन्होंने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हर कोई चाहता है कि वह पूरे परिवार के साथ ऐसी फिल्म देख सके, जिसका आनन्द पूरा परिवार उठा सके, लेकिन लोगों की यह मनोकामना पूर्ण नहीं हो पा रही है।
इस अवसर पर 7 डेज़ इन स्लो मोशन की निर्माता सौम्या श्रीरमण भी उपस्थित थीं। उन्होंने भी कहा कि आज पूरे परिवार के लिए स्वस्थ और मनोरंजनकारी फिल्मों का अभाव है। फिल्म के निर्देशक और निर्माता ने विचार व्यक्त किया कि फिल्म टिकटों के बहुत ऊंचे दामों के कारण भी लोग परिवार के साथ फिल्में नहीं देख पा रहे हैं। Read Full Kaput Article »