विश्व सिनेमा चर्चा में फिल्म की कहानी - दूरस्थ तटीय गांवों में सुविधाओं की बढोत्तरी घातक बीमारी के कारण रुक जाती है और निवासी सरकार की मदद पाने के लिए बाध्य हो जाते हैं । 6 ग्रामीणों को एक जानकार, विद्वान व्यक्ति के किराये पर लेने के लिए नई दिल्ली भेजा जाता है, जो प्रशासन के सामने उनका पक्ष रख सके ।
बड़े शहर में गुम उत्साही और परिश्रमी ग्रामीणों का हर बार शोषण किया जाता है । वह बिना सोचे समझे एक बड़ी परेशानी में फंस जाते हैं और आवारा लड़कों द्वारा बचाकर एक असंतुष्ट पूर्व प्रोफेसर के पास लाए जाते हैं । वह ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों का घेराव करने के लिए उकसाता है । लेकिन इससे भी कोई मदद नहीं मिलती ।
विषाद से भरी एक अभिजात बुर्जुग महिला अपने पूर्व गौरव के अंतिम प्रदर्शन की अभिलाषा से उनके लिए एक दावत का आयोजन करती है, जहां उन्हें घर जैसा एहसास होता है और वह कविताएं सुना रहे हैं, नृत्य कर रहे हैं तथा खुश हैं । वह हार के साथ नहीं बल्कि अविस्मरणीय यादों के साथ अपने गांव वापस लौटते हैं ।
विश्व सिनेमा - ईरान - 95 मिनट 35 मिमि रंगीन 2008
निर्देशक चेपौर हघीघट
पटकथा चेपौर हघीघट
फिल्मांकन मृणाल देसाई
सम्पादक केथरीन क्वेशम,चेपौर हघीघट
संगीत चन्द्रकांत लिमये (गायन) अतुलचन्द्र तडे (तबला)
और संगीत मिश्रा (सारंगी), सुनील होलकर